श्री गणेशाय नमः
श्री शिव साईं नाथाय नमः

परिचय एवं विकास यात्रा

ब्रम्हा विष्णु महेश सृष्टि के कर्ता-धर्ता सर्वत्र विद्यमान है। कण-कण में व्याप्त इस तत्व को हमने आस्था पूर्वक माना है।“

श्री रामचरित्र मानस के अनुसार :-

एहिं कलिकाल न साधन पूजा, जोग जग्य जप तप व्रत पूजा

इस कलयुग में भक्ति मार्ग से ही , हम ईश्वर तक पहुंचने का प्रयास कर सकते है। इन्हीं उद्देशों  के साथ  “ श्री साईंभक्त मंडली खमरिया जबलपुर” का सृजन व गठन अक्टूबर १९५८ में हुआ ।

गुरूब्रम्हा गुरूर्विष्णु , गुरू देवो महेश्वरः”
गुरू: साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरवे नम:

उक्त वैदिक श्लोक के तहत अनंत कोटि ब्रम्हांड नायक राजाधिराज योगीराज परब्रम्ह सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईंनाथ जी का पूजन, प्रति गुरूवार सामूहिक पूजन चिंतन व भजनके साथ, आध्यात्मिक उत्सव रूपी उपक्रम में प्रारंभ हुआ ।संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष स्व.श्री एम.यू.प्रभू अन्य सदस्य इस संस्था के नीव के पत्थर थे । बलवान समय ने करवट बदली,असंख्य भक्तों की तपस्या पूर्ण होते ही, र्इश्वरीय भेंट के रूप में , सन् १९६९ (श्री महा शिवरात्रि के दिन) में आयुध निर्माणी खमरिया प्रशासन की स्वीकृतिअनुमति से डी.एस.सी. परिसर के एक प्राचीन शिव मंदिरको श्री अधिग्रहित करते हुये ‘तपोभूमि’ प्राप्त हुई। जिससे संस्था को स्थायित्व प्राप्त हुआ ।

संस्कारधानी के पूर्व भाग में , हरियाली से अच्छादित अनुपम सौन्दर्य में बसा – आयुध निर्माणी खमरिया परिसर एवं डी.एस.सी. के अति सुरक्षीत क्षेत्र में आध्य दैवत श्री साई सदाशिव एवं सदगुरू सार्इनाथ का मिलन स्थान श्री शिव साईं मंदिरके रूप में पूर्ण विकसित हुआ। जिसका प्रबंध व संचालन श्री साईं भक्त मंडली खमरिया द्वारा क्रमश: जारी है। आयुध निर्माणी खमरिया के प्रथम व्यक्ति अर्थात महाप्रबंधक इस पवित्र संस्थानके संरक्षक है। एवं प्रबंध समिति का चुनाव प्रतिवर्ष श्री रामनवमीं के पुण्य पर्व पर होता है, संस्था का अपना निजी लिखित विधि विधान भी है।